CCE प्रणाली SIQE के अंतर्गत शिक्षण हेतु एक नजर में

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सीसीई की पृष्ठभूमि—

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था सरकार का दायित्व है प्रारंभिक शिक्षा में विद्यार्थियों के शैक्षिक उन्नयन के उद्देश्य से राज्य में एस आई क्यू ई (स्टेट इनिशिएटिव फॉर क्वालिटी एजुकेशन) प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है इसके तहत राज्य में शिक्षकों की क्षमता संवर्धन के साथ साथ गतिविधि आधारित बाल केंद्रित शिक्षण के आधार पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली को अपनाया गया है

सीसीई के उद्देश्य –

1.बाल केंद्रित शिक्षण द्वारा सीखने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना

  1. बच्चों में परीक्षा के भय को दूर करना

3.गतिविधि आधारित शिक्षण द्वारा शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को रुचिकर आनंददाई एवं प्रभावी बनाना

4.ज्ञान को स्थाई एवं प्रभावी बनाते हुए प्राथमिक शिक्षा की नींव को मजबूत करना

5.स्तरानुसार अनुसार शिक्षण योजना बनाकर शिक्षण कार्य करते हुए शैक्षिक प्रगति को नियमित रूप से दर्ज करना

6.बच्चों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाते हुए संज्ञानात्मक एवं व्यक्तित्व विकास के सभी पक्षों का मूल्यांकन करना

  1. बच्चों के अधिगम स्तर में गुणात्मक विकास के साथ-साथ नामांकन एवं ठहराव में वृद्धि करना

8.बच्चों की प्रगति को अभिभावकों के साथ साझा करना

सीसीई के अंतर्गत एक शैक्षिक सत्र के लिए योजना एवं आकलन की संरचना –

1.आधार रेखा मूल्यांकन /पद स्थापन- प्रत्येक सत्र के आरंभ में कक्षा कक्षीय प्रक्रिया के दौरान मौखिक , कार्यपत्रक एवं गतिविधियों के आधार पर बच्चों का आकलन कर उपलब्धि को दर्ज करते हुए आधार रेखा मूल्यांकन किया जाता है तथा प्रत्येक टर्म के अंत में योगात्मक आकलन से प्राप्त अधिगम स्तरों की प्रगति के आधार पर आगामी टर्म के लिए पद स्थापन किया जाता है

2.सतत शिक्षण आकलन योजना- आधार रेखा मूल्यांकन/ पदस्थापन से प्राप्त कक्षा स्तर को शिक्षक अपने अध्यापक योजना डायरी में लिखता है और इस आधार पर शिक्षण और आकलन की आगामी कार्ययोजना का निर्माण कर तदनुसार कक्षा कक्षीय प्रक्रिया में शिक्षण करवाते हुए सतत एवं व्यापक मूल्यांकन किया जाता है

3.रचनात्मक आकलन- यह किसी कौशल /पाठ सूचक/ अवधारणा एवं उपअवधारणा के अंतर्गत निहित उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए आकलन करने हेतु कक्षा-कक्ष की प्रक्रिया के दौरान प्रगति को जांचने की प्रक्रिया है जो रचनात्मक आकलन की चेक लिस्ट में नियमित संधारित किया जाने वाला आकलन है

  1. योगात्मक आकलन मूल्यांकन जिसके चरण निम्न है –
    (1) चेक लिस्ट
    (2) अनुभव समीक्षा
    (3)कक्षा कार्य
    (4)गृह कार्य
    (5)पोर्टफोलियो
    (6)वर्कशीट
    (7)पेपर पेंसिल टेस्ट
    (8) अभिभावक संवाद इत्यादि।
  2. ग्रेड दर्ज करने की प्रक्रिया
    A- स्वतंत्र रूप से काम करने की स्थिति या अग्रिम स्तर की समझ
    B- शिक्षक की मदद मार्गदर्शन से काम करने की स्थिति या मध्यम स्तर की समझ
    C-शिक्षक की विशेष मदद से काम करने की स्थिति या आरंभिक स्तर की समझ
  3. पोर्टफोलियो- इसमे एक निश्चित अवधि में बच्चे की निरंतर अधिगम की उपलब्धियों को साक्ष्य के रूप में संधारित करके रखने हेतु इसका संधारण किया जाता है इसमें आधार रेखा मूल्यांकन विषय वार नियमित कार्यपत्रक मौखिक गतिविधियों के आधार पर तैयार प्रपत्र एवं पेपर पेंसिल टेस्ट इत्यादि के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास के दस्तावेज भी रखे जाते हैं।
    इन संकलित दस्तावेजों पर शिक्षक द्वारा गुणात्मक टिप्पणी दर्ज कर प्रतिपुष्टि प्रदान की जाती है और इसे समय समय पर अभिभावकों से साझा किया जाता है । यह बच्चे की प्रगति का आईना है।

Author: adminlive

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